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Vrikshasan वृक्षासन मानसिक और शारीरिक तनाव को दूर करने में मददगार है

संस्कृत शब्द वृक्ष को अंग्रेजी में ट्री कहते हैं। इसके पर्यायवाची शब्द है झाड़ और पेड़। वृक्षासन को करने से व्यक्ति की आकृति वृक्ष के समान नजर आती है इसीलिए इसे वृक्षासन कहते हैं।

नटराज आसन के समान यह आसन भी शारीरिक संतुलन के लिए बहुत ही लाभप्रद है| जहां एक ओर Vrikshasana से हमारे शरीर के विभिन्न अंगों को लाभ पहुँचता है, वहीं मानसिक तनाव को भी यह आसन दूर रखता है| कहने का मतलब यह है कि अगर आप मानसिक संतुलन बनाये रखना चाहते है तो वृक्षासन कीजिये| वृक्षासन के अनेक लाभ है अगर इसे नियमित रूप से किया जाएं


योगाचार्यों के अनुसार वृक्षासन को प्रातः काल में करने से यह ओर भी अधिक लाभप्रद होता है| इस आसन को करने से बेडोल शरीर सुडौल बनता है| जिन व्यक्तियों को घुटने में दर्द की समस्या है उन लोगो को यह आसान जरूर करना चाहिए| इस आसन को करने से आपके घुटनो का दर्द बिलकुल बंद हो जायेगा| यह आसन उन लोगों को खासकर करना चाहिए, जिन्हें अधिक चलना पड़ता है जैसे सेल्स मैन, कोरियर बॉय आदि| इस आसन को करने से आपके पैरों को मजबूती मिलती है

अवधि/दोहराव


जब तक इस आसन की स्थिति में आसानी से संतुलन बनाकर रह सकते हैं सुविधानुसार उतने समय तक रहें। एक पैर से दो या तीन बार किया जा सकता है।

वृक्षासन 

इस आसन को करते समय एक पैर को मोड़कर, दूसरे पैर को दृढ़ता से जमीन पर रखना चाहिए| एक पैर पर खड़े होकर हाथों को सिर के ऊपर लाना होता है| इस आसन को करते समय आपको यह महसूस करना चाहिए की आपका पैर एक जड़ है, जिस पर पेड़ के समान शरीर टिका हुआ है| अब अपने ध्यान को केंद्रित कर सामने की ओर देखें| सहज रूप से साँस लेते रहे| इस आसन को 


  • सीधे तनकर खड़े हो जाइये|
  • दायें पैर को जमीन पर दृढ़ता से रखें|
  • अब बायें पैर को धीरे -धीरे ऊपर उठाएं और दायें पैर के घुटनों के ऊपर रखें|
  • अब दोनों हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में अपनी छाती से लगाएं|
  • संतुलन बनाये रखने के लिए अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाएं|
  • अब सिर को सीधा रखे और अपनी आँखों को सिर के मध्य में केंद्रित करें|
  • अब इस अवस्था में 1-2 मिनट तक खड़े रहे|
  • दोनों पैरों से इस मुद्रा को 2-5 बार दोहराए|

वृक्षासन से लाभ


इससे पैरों की स्थिरता और मजबूती का विकास होता है। यह स्नायुमण्डल का विकास कर पैरों को स्थिरता प्रदान करता है। यह कमर और कुल्हों के आस पास जमीं अतिरिक्त चर्बी को हटाता है तथा दोनों ही अंग इससे मजबूत बने रहते हैं। यह तोंद नहीं निकलने देता।

इस सबके कारण इससे मन का संतुलन बढ़ता है। मन में संतुलन होने से आत्मविश्वास और एकाग्रता का विकास होता। इसे निरंतर करते रहने से शरीर और मन में सदा स्फूर्ति बनी रहती है।

  • इस आसन से पैरों की चर्बी और पेट कम होता है|
  • पैरों में मजबूती आती है और शरीर का संतुलन बेहतर होता है|
  • याददाश्त और एकाग्रता बढ़ती है तथा दिमाग शांत रहता है|
  • शारीरिक और मानसिक तनाव को कम करता है|
  • घुटने में दर्द से राहत मिलती है|
  • यह पेट, कमर और कूल्हे के आसपास जमी चर्बी को ख़त्म कर देता है और आपके शरीर को सुडोल बनाता है|

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