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मंगल गृह पर जीवन इतना आसान नहीं : जितना आप सोच रहे है

 


वैसे तो आपको भी पता है इस पृथ्वी से बाहर की  दुनिया कितनी रोमांचक और रहस्यमय है। इसी बिच एक बड़ी खबर सुनकर वैज्ञानिको की नींद उड़ गई है।  शायद  इंसान की यही चाहत होगी की वो जिस धरती पर रह रहा है वो बाहर से देखे की आखिर यह केसी दिखती होगी?  या पुरे उसे ब्ब्राह्माण  मे किस तरह के गृह है और किस गृह  पर जीवन संभव है? 

कहा है संभव 


कहा जाता है की मंगल गृह पर जीवन संभव है जिसकी तलाश वैज्ञानिक लम्बे समय  से कर रहे है।  वैसे देखा जाये तो अभी तक किसी भी देश को इस दिशा मे कोई खास सफलता नहीं मिली "इसी बिच एक बड़ी खबर सुनकर वैज्ञानिको की नींद उड़ गई है 

 आखिर क्या वजह है 


जैसा की आप जानते है NASA हर दिन कई प्रकार के शोध करता रहता है।  इसी बिच नासा  के मंगल गृह अभियान को लेकर वैज्ञानिको का मानना  है की इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती,  वहा उपस्थित सूक्ष्म  जीवो के अवशेष के प्रमाण  को जुटाना।  

नासा  का "पेरसेवर्स" रोवर  मंगल के जेजेरो  क्रेटर पर जाकर वहा जीवन का प्रमाण तलाश करेगा। 

लम्बे समय तक चलने वाले इस कार के आकर का रोवर बनाया गया जो hd-कैमरा, माइक्रोफोन (microphone),  ड्रिल  और लेज़र से युक्त है।  नासा को उम्मीद है की यह अनुमान के अनुसार रोलर 8 महीने और 45km की यात्रा करने के बाद अगले वर्ष 15 फरवरी को मंगल गृह पर पहुंच जाएगा। और 2031 मे यह पुनः धरती पर  लाया जाएगा। 



भारत मे गुजरात के एक भौतिक अनुसन्धान प्रयोगशाला मे भारतीय  वैज्ञानिक द्विजेश राय ने बताया है की  परसेवारेंज रोवर इस अभियान का 

सबसे ज्यादा रोमांचक हिस्सा वह वैज्ञानिक विश्लेषण है 

जो की गृह पर प्राचीन सूक्ष्म  जीवो का उपस्थिति का परिक्षण करेगा।  क्युकी इससे रोमांचित करने वाली जानकारी सामने आ सकती है 


नासा के ब्रिडेन्स्टीन  ने बताया की हमें पता नहीं वजा जीवन संभव है या नहीं  लेकिन हम जानते है इतिहास मे एक समय था जब मंगल रहन लायक था। अब तक केवल अमरीका अंतरिक्ष  सफलतापूर्वक पंहुचा पाया है।  वह  1976 मे वाइकिंग  से प्रारम्भ  कर के ऐसा आठ बार कर चूका है।  





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